देश में ग्रामीण क्रांति के लिए जैव शौचालय –जयराम रमेश

ग्रामीण विकास और पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री श्री जयराम रमेश ने बताया कि अगले दो वर्षों में देश के करीब 300 पिछड़ी ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुकित दिलाने के लिए एक लाख जैव शौचालय स्‍थापित किए जाएंगे। उन्‍होंने कहा कि परियोजना के पहले चरण में 150 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उन्‍होंने यह जानकारी डीआरडीओ द्वारा विकसित जैव शौचालय को लेकर डीआरडीओ और पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय के बीच सहमति-पत्र पर हस्‍ताक्षर के बाद दी। श्री रमेश ने कहा कि उनके मंत्रालय ने सभी नए रेल डिब्‍बों में डीआरडीओ द्वारा निर्मित जैव शौचालय स्‍थापित करने की पेशकश की है तथा अगले चार-पांच वर्षों में मौजूदा 50,000 डिब्‍बों में मरम्‍मत का खर्च साझा करने की पेशकश की है। उन्‍होंने बताया किया कि इस पूरी परियोजना पर करीब पांच सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे और रेलवे के साथ आधा खर्च साझा करने की पेशकश की। उन्‍होंने कहा कि इन उपायों से न सिर्फ रेल पटरियों का क्षरण रुकेगा बल्कि यात्रियों को दुर्गंध रहित शौचालय भी उपलब्‍ध होंगे। श्री रमेश ने कहा कि भारत में स्‍वच्‍छता की चुनौतियों के तीन आयाम हैं और इनके समाधान के लिए गंभीरता से काम करना होगा। पूरी दुनिया में खुले में शौच का 60 प्रतिशत हिस्‍सा भारत में होने के आंकड़े का हवाला देते हुए श्री रमेश ने वायदा किया‍ कि अगले दस वर्षों में वे देश को खुले में मलत्‍याग से मुक्ति दिला देंगे। उन्‍होंने कहा कि 11 मिलियन लोग हर रोज रेल से यात्रा करते हैं और वर्तमान समय में रेलगाडि़यों में मौजूदा शौचालय व्‍यवस्‍था के तहत उनके शौच को सीधा पटरियों पर फेंक दिया जाता है। श्री रमेश ने बताया कि स्‍वच्‍छता की समस्‍या का तीसरा आयाम यह है कि अब भी देश में 15 लाख शौचालय ऐसे हैं, जहां से जमा शौच उठाकर कहीं बाहर फेंकने का काम लोगों द्वारा किया जाता है। श्री रमेश ने कहा कि डीआरडीओ तकनीक एक महत्‍वपूर्ण रास्‍ता है, न कि जादू की कोई छड़ी, लेकिन उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि लंबे समय में इससे ग्रामीण इलाकों में सफाई को लेकर क्रांति आएगी, यदि इस काम को मिशन के तौर पर किया जाए।
Source - PIB - ID

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