...जब अवार्ड जीतने के बाद पिता का खत पढ़ रो पड़ीं दीपिका



नई दिल्ली: अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को फिल्म पीकू के लिए तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार दिया गया. ये मौका तब और खास बन गया जब पिता और बेटी के रिश्तों पर आधारित फिल्म पीकू के लिए पुरस्कार लेने पहुंची दीपिका ने अपने बैडमिंटन खिलाड़ी पिता प्रकाश पादुकोण की एक चिट्ठी पढ़कर सुनाई और सिसकती रहीं.

एक उम्रदराज अकेला पिता और उसका खयाल रखने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार बेटी. कुछ ऐसे ही ताने-बाने से बुनी गई थी पीकू की कहानी पिछले साल आई इस फिल्म ने दीपिका को तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता बना दिया है लेकिन हम जो कुछ आपको दिखाने और सुनाने जा रहे हैं वो सिर्फ जश्न नहीं बल्कि दिल को छू लेने वाला ऐसा पल है जो आपकी आंखें भी नम कर देगा.
दीपिका पादुकोण के पिता प्रकाश पादुकोण

पीकू के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार लेने पहुंची दीपिका ने फिल्म के निर्देशक, निर्माता और साथी कलाकारों का शुक्रिया नहीं अदा किया बल्कि इस मौके को उन्होंने एक भावुक पल में बदल दिया. दीपिका ने बैडमिंटन चैंपियन पिता प्रकाश पादुकोण का एक खत दुनिया के सामने रख दिया जो दीपिका के कामयाब फिल्मी करियर की शुरुआत में लिखा गया था.

खत में लिखा था

प्यारी दीपिका और अनीशा,
तुम दोनों उस मोड़ पर हो जहां से जिंदगी शुरू होती है. मैं तुमसे वो सबक साझा करना चाहता हूं जो जिंदगी ने मुझे सिखाए हैं. दसियों साल पहले बैंगलोर में एक छोटे बच्चे ने बैडमिंटन से रिश्ता जोड़ा था. उन दिनों ना तो कोई स्टेडियम थे और ना ही कोई बैडमिंटन कोर्ट जहां लोग ट्रेनिंग ले पाते. मेरा बैडमिंटन कोर्ट दरअसल घर के करीब केनरा यूनियन बैंक का एक शादी हॉल था. मैंने वहीं पर खेलना सीखा.

हर रोज हम इंतजार करते कि कहीं हॉल में कोई फंक्शन तो नहीं है. अगर नहीं होता तो हम स्कूल से भागकर वहां पहुंच जाते ताकि हम अपने दिल की चाह पूरी कर सकें. मेरे बचपन और कच्ची उम्र की सबसे अहम बात ये थी कि मैंने जिंदगी में मैंने कभी किसी कमी की शिकायत नहीं की. मैं इसी बात से खुश रहा है कि हमें हफ्ते में कुछ दिन खेलने की सुविधा मिल जाती थी. मेरा करियर और जिंदगी दोनों में मैंने कभी कोई शिकवा नहीं किया और यही मैं तुम बच्चों को बताना चाहता हूं कि जुनून, जीतोड़ मेहनत, जिद और जज्बे की जगह कोई चीज नहीं ले सकती.

दीपिका ने फिल्म फेयर अवार्ड समारोह में अपने पिता के इस खत को पढ़ने में करीब पांच मिनट का वक्त लिया और बार बार रोती रहीं. बैडमिंटन खिलाड़ी रहे प्रकाश पादुकोण का ये खत बताता है कि दीपिका का फिल्मी दुनिया में पहला कदम दरअसल एक मुश्किल फैसला था.

दीपिका जब तुमने 18 साल की उम्र में कहा था कि तुम्हें मुंबई जाना है क्योंकि तुम मॉडलिंग करना चाहती हो तो हमें लगा था कि तुम एक बड़े शहर और एक बड़ी इंडस्ट्री के लिए बेहद छोटी हो और तुम्हें कोई तजुर्बा भी नहीं है. लेकिन आखिर में हमने तय किया कि तुम्हें तुम्हारे दिल की करने दिया जाए क्योंकि ये बहुत गलत होता अगर एक बच्चे को वो सपना पूरा करने का मौका नहीं दिया जाता जिसके साथ वो बड़ी हुई है. अगर तुम कामयाब हो जाती तो हमें गर्व होता और अगर नहीं होती तो तुम्हें कभी अफसोस नहीं होता क्योंकि तुमने कोशिश की थी.

दीपिका ने दुनिया को अपने पिता की जो चिट्ठी सुनाई है उससे ये भी पता चलता है कि इंडस्ट्री की स्टार बन चुकी दीपिका की घरेलू जिंदगी में सादगी और सिद्धांतों की कितनी जगह है

याद रखो कि मैंने तुम्हें हमेशा यही बताया है कि दुनिया में अपना रास्ता कैसे बनाना है बिना इस बात का इंतजार किए कि तुम्हारे माता-पिता तुम्हें उंगली पकड़कर वहां पहुंचाएंगे. मेरा मानना है कि बच्चों को अपने सपनों के लिए खुद मेहनत करनी चाहिए ना कि इस बात का इंतजार कि कोई कामयाबी उन्हें प्लेट में सजाकर देगा.

जब तुम घर आती हो तो तुम अपना बिस्तर खुद लगाती हो, खाने बाद मेज खुद साफ करती हो और जमीन पर सोती जब घर में मेहमान होते हैं. तुम कभी सोचती होगी कि हम तुम्हें एक स्टार समझने को क्यों तैयार नहीं हैं तो तुम हमारे लिए बेटी पहले हो और एक फिल्म स्टार बाद में.
दीपिका ने जब अपने पिता का खत पढ़ा उसके बाद अभिनेता रनवीर सिंह ने खड़े होकर उनके लिए तालियां बजाईं.

दीपिका पादुकोण ने जब खत को पूरा पढ़ा तो पूरा सभागार तालियों से गड़गड़ा उठा. अभिनेता रनवीर सिंह ने दीपिका के लिए खड़े होकर ताली बजाईं. जिस दौरान दीपिका ने यह खत पढ़ा उनके पिता प्रकाश पादुकोण भी वहीं मौजूद थे. दीपिका के भावुक कर देने वाले लम्हें के बाद सभी ने प्रकाश पादुकोण को बधाई दी.
Source - ABP News

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