PM’s address at the National Conference of Women Legislators

मैं सुमित्रा जी को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने इस कार्यक्रम की योजना की, कल्पना की लेकिन उससे ज्यादा भी बधाई मैं आप सबको देता हूं क्योंकि मैंने जानकारी पाई की किस प्रकार से सत्र हुए, विषय हुए, आप सबका participation रहा, सक्रिय भागीदारी रही और, ज्यादातर लोग उपस्थित रहे। वरना दिल्ली आए तो और भी कुछ काम होते हैं तो ऐसा शायद कम हुआ तो ये अपने आप में, आपके लिए यह समारोह जिज्ञासा से भरा हुआ रहा। जहां आप कार्य करते-करते जो कठिनाइयां भुगत रहे हैं, उसका समाधान चाहते हैं।

जिन सपनों को लेकर के आप सार्वजनिक जीवन में आए। उन सपनों को पूरा करने के लिए अपने आपको सक्षम कैसे बनाया जाए, उसके लिए कहीं से कोई मार्गदर्शन मिले, जानकारी मिले, रास्ता खोजने का प्रयास मिले । इन सारी बातों का परिणाम है कि आप इस डेढ़ दिवस में अनेक विषयों पर सक्रियता से हिस्सा लिया लेकिन मैं एक तीसरे विषय की ओर कहना चाहता हूं कि कभी-कभी इस प्रकार के समारोह में Structured way में जो चीजें मिलती हैं, उससे ज्यादा मेल जोल के समय, चाय के समय, भोजन के समय या आते-जाते, परिचितों से, अपरिचितों से जो बातें होती हैं। उनसे जो अनुभव बांटने का अवसर मिलता है, वो structured programme से भी ज्यादा ताकतवर होता है और वो आप लोगों ने पाया है और उस अर्थ में देशभर के महिला जनप्रतिनिधियों का ये समारोह आने वाले दिनों में आप अपने-अपने क्षेत्रों में जहां जाएंगे, वहां कोई न कोई सकारात्मक भूमिका अदा करेगा और आपको अवश्य सफलता मिलेगी। 

यहां पर सुषमा जी के एक quote का उल्लेख हुआ लेकिन मैं उसे महिला और पुरुष के संदर्भ में नहीं कहना चाहता लेकिन एक बात कि ये जो महिला सशक्तिकरण, ये मनोवैज्ञानिक अवस्था को बदलने की आवश्यकता मुझे लगती है। सशक्तिकरण उनका होता है, जिनका सशक्तिकरण नहीं है लेकिन जो सशक्त है, उनका सशक्तिकरण कौन करेगा और ये बात मेरे गले नहीं उतरती कि पुरुष होते कौन हैं जो सशक्त करेंगे लेकिन आवश्यक ये है कि हम स्वंय को पहचानें। 

हम अपनी शक्तियों को तब तक नहीं पहचानते हैं, जब तक हमें चुनौतियों से जूझने का अवसर नहीं आता है। जितने भी प्रकार के समाज, जीवन के सर्वे होते हैं उसमें एक बात आती है। अगर पत्नी का स्वर्गवास हो गया, पुरुष अकेला परिवार चलाता है तो न लंबा समय परिवार चला सकता है और न लंबा समय वो जीवित रह सकता है और अगर पुरुष नहीं रहा हो, महिला को परिवार चलाने की जिम्मेवारी आ गई सारा सर्वे कहते हैं कि वह लंबे अरसे तक जीवित भी रहती है और परिवार का लालन-पालन उत्तम तरीके से करके दिखाती है। 

ये उस बात सुबूत है कि inherent जो सामर्थ्य और शक्ति ईश्वर प्रदत्त आप लोगों को है, महिलाओं को है। जिसको पहचानना स्वंय में बहुत आवश्यक है। आजकल management की दुनिया में एक शब्द बड़ा प्रचलित है multi star activity ये multi task activity दुनिया के कई देशों में जो व्यक्तित्व का growth हुआ है वो एक single tunnel activity का होता है। अगर उसमें वो चलता रहा तो आगे बढ़ता जाता है, बहुत कुछ contribute करता है लेकिन उस tunnel में कहीं रुकावट आ गई, कहीं और रास्ते पर जाने की नौबत आई तो नहीं कर पाता है। अगर daily उसको lift से जाने की आदत है, 10 वीं मंजिल पर बैठा है और अचानक बिजली चली जाए तो stair case से नीचे उतरना, उसका घंटा लग जाता है क्या करूं, ऐसे लोग होते हैं।

Multi Task activity आज managerial world में एक विशिष्ट शक्ति के रूप में माना जाता है लेकिन हमारे देश में महिलाओं की ओर देखिए। शायद Multi Task activity में इनसे बढ़कर कोई नहीं हो सकता है। वो FM पर गाने भी सुनती होगी, Mobile पर बात भी करती हो और पकाती भी होगी, बच्चे को भी सूचना देती होगी, ये यानि कभी हम थोड़ा dissection करके इस चीज को देखें तो अंदाज आता है क्या सामर्थ्य दिया है, क्या शक्ति दी है। क्या हम इस शक्ति का गौरव करना जानते हैं, इस सामर्थ्य को पहचानते हैं।

ये भी देखिए जहां-जहां महिला को अवसर मिला है, उसका सफलता का स्तर बहुत ऊंचा है। आप पिछले वर्षों से याद कीजिए कौन Foreign Minister थे देश के नाम ही याद नहीं आएगा लेकिन आज सुषमा जी तुरंत याद आती हैं आपको। सामर्थ्य हम अनुभव करते हैं।

हमारे Parliament में कई Speaker आए लेकिन जितने महिला Speaker आए हरेक को ध्यान रहा होगा कि मीरा कुमार थीं, सुमित्रा जी हैं। आजकल राज्यो में भी बहुत बड़ी मात्रा में महिला Speaker role कर रही हैं। जहां-जहां उनको अवसर मिला। अगर मैं नहीं जानता हूं कि किसी ने सर्वे किया है कि नहीं किया है लेकिन अगर सर्वे करे तो शायद पुरुषों को मिले हुए अवसर, उनका success ratio and महिला को मिला अवसर, उनका success ratio, मैं विश्वास से कहता हूं महिलाओं का ऊपर गया होगा। इसका मतलब ये है कि सामर्थ्य है। हमारे देश में ये पहली सरकार ऐसी है जिसमें इतनी बड़ी मात्रा में महिला मंत्रियों का प्रतिनिधित्व है क्योंकि मेरा conviction है कि उनको अगर अवसर मिले तो वो बहुत उत्तम परिणाम दे सकते हैं और आज हम अनुभव भी कर रहे हैं कि परिणाम देते हैं।

आप लोगों ने शायद पिछली शताब्दी के उत्तरार्द्ध में Africa का एक छोटा सा देश Rwanda, उसकी घटना शायद अगर आपके कान पर आई हो। वहां एक बहुत बड़ा नरसंहार हुआ, लाखों की तादाद में लोग मारे गए और ज्यादातर पुरुष मारे गए। बाद में महिलाओं ने देश की कमान संभाली और हिम्मत के साथ वो मैदान में आईं। आज उनके lower house में करीब 65 percent women representative हैं और इतनी भयंकर आपत्ति से निकले हुए देश को महिलाओं ने leadership दी और महिलाओँ ने देश को बाहर निकाला। आज Rwanda अपने पैरों की ताकत पर खड़ा हो गया। ये अपने आप में एक बहुत बड़ा उदाहरण है कि कठिनाइयों से गुजरने के बाद भी जिनको अवसर मिला, उन्होंने कितना बड़ा परिवर्तन किया, कितना बड़ा परिणाम लाया है और इसलिए लेकिन एक जनप्रतिनिधि के नाते, हम सशक्त हों कि हम राष्ट्र को सशक्त बनाने में कोई extra भूमिका अदा कर सकते हैं क्या, राष्ट्र को सशक्त बनाने में बजट काम नहीं आता है। राष्ट्र को सशक्त बनाने में रोड, रास्ते, port, airport, building, भवन, इमारतें ये काम नहीं आती हैं। 

राष्ट्र को सशक्त बनाता है, राष्ट्र का जन-जन राष्ट्र को सशक्त बनाता है। राष्ट्र को सशक्त बनाता है राष्ट्र का नागरिक और कोई नागरिक को कोई सशक्त बनाता है, उसको अगर सामर्थ्यवान बनाता है, उसको अगर चरित्रवान बनाता है तो मां बनाती है, उससे बड़ा राष्ट्र का निर्माण कोई नहीं कर सकता है। उससे बड़ा राष्ट्र का निर्माण, सशक्तिकरण कोई नहीं कर सकता, जो सदियों से माताएं-बहनें करती आई हैं। पीढ़ियों तक उत्तम रत्नों को देकर के समाज, जीवन का सशक्तिकरण का सबसे मूलभूत काम आप ही के द्वारा तो हुआ है लेकिन जो हुआ है उसका अगर गर्व नहीं होगा। हम ही inferiority complex में रहेंगे, हम ही सोचेंगे कि नहीं उन लोगों का ज्यादा अच्छा है तब तो मैं नहीं मानता हूं कि ये आगे बढ़ने का जो आपका इरादा है, उसको पार करने में कोई मददगार होगा।हम स्वंय ही इतने सामर्थ्यवान है, इसका अहसास करेंगे और ये मेरे कहने के कारण है नहीं, आप हैं। 

कभी-कभार, नारी के दो रूप घर में अगर वो चूल्हे पर खाना पका रही है, चपाती बना रही है और चपाती बनाते-बनाते उसमें से थोड़ी भाप निकल गई, steam निकल आई और उसकी ऊंगली जल गई तो फूंक मारती है लेकिन उसका ध्यान फिर खाने में नहीं रहता है, पकाने में नहीं रहता है। वो पतिदेव के आने का इंतजार करती है। तीन बार खिड़की में जाकर के देखेगी कहीं आए तो नहीं हैं और उसकी कोशिश रहती है कि वो आते ही सामने ये जलती हुआ ऊंगली का चित्र खड़ा करे। उसको लगता है कि आज मेरे पतिदेव देखें कि मैं आज चपाती बनाते-बनाते मेरी ऊंगली जल गई है। फूंक लगाएगी, पानी मांगेगे, अरे देती हूं पानी, जली है दो घंटे पहले और पति आएंगे, उसको कहेंगे कुछ लगा दीजिये। वो ही नारी चपाती से भाप निकलती है, ऊंगली अगर थोड़ी सी भी जल गई, पति का इंतजार करती है कि पति देखे लेकिन मौहल्ले में आ लग गई, मां गई है बाजार में सब्जी खरीदने के लिए, अच्छा सा discount सेल चल रहा है। 10 percent, 20 percent, साड़ियां आई हैं बहुत बढ़िया और नारी गई है वहां purchasing के लिए, साड़ियां देख रही है और पता चले कि उस मोहल्ले में आग लगी है, वो उन सारी साड़ियों को लात मारकर के दौड़ती है जाकर के। 

अड़ोस-पड़ोस के लोग उस घर को आग बुझाने के लिए कोई मिट्टी डाल रहा है, कोई पानी डला रहा है, वो आकर के चीखती है कि मेरा बेटा अंदर है। अड़ोस-पड़ोस के कितने ही मर्द, मूंछों वाले खड़े होंगे, कोई जाने की हिम्मत नहीं करेगा। वो मां जिंदगी और मौत का खेल खेलते हुए आग में उलझ जाएगी और बच्चे को लेकर के बाहर आ जाएगी। चपाती में से निकली भाप के कारण जिसकी ऊंगली जलती है तो उसका एक रूप होता है लेकिन संकटों के सामने जब उसका प्रेम उभर करके आता है, दूसरी ताकत होती है। ये शक्ति के धनी आप लोग हैं और वो ही शक्ति है जो राष्ट्र को ताकतवर बनाती है, राष्ट्र को सामर्थ्यवान बनाती है और इसलिए जनप्रतिनिधि के नाते, मान लीजिए मेरा कितने-कितने प्रकार के role होंगे। हमारा काम है विधायिका में कानून बनाना, क्या मैंने उस कानून को बनाते समय उसका जो draft आया है, उसको उस बारीकी से देखा है कि जो मेरा जो सशक्तिकरण का एजेंडा है, उसमें ये फिट बैठता है कि नहीं बैठता है। कोई शब्द की कमी है कि नहीं है। अगर है तो मैं जागरुक प्रतिनिधि के रूप में उस बात को मनवाने के लिए कोशिश कर रही हूं कि नहीं कर रही हूं। आप देखिए बहुत बड़ा contribution होगा।

आप के कार्यकाल में एकाध ऐसा कानून बनता है। जिस कानून के अंदर आपने एक ऐसे शब्द को लाकर के रख दिया, जो शब्द आने वाली पीढ़ियों का जीवन बदल सकता है। कितना बड़ा contribution है लेकिन क्या मेरा उस प्रकार से प्रयास हो रहा है। जनप्रतिनिधि के नाते ये मेरा दायित्व बनता है कि मैं जो संवैधानिक काम है, उसमें मुख्यतः मेरा काम है और इतना ही नहीं कोई भी परिवार में जब मकान बनता है न कितने ही architecture क्यों न हो, कितने ही design बनाकर के आएं लेकिन आखिर तक तो ठप्पा वो मां लगाती है, नहीं-नहीं kitchen ऐसे जाहिए, toilet यहां चाहिए। मंदिर यहां चाहिए, जूते यहां लगाने होंगे तब जाकर के घर ठीक चलेगा। उसको वो engineer है कि नहीं है, वो architecture है कि नहीं है लेकिन उसको समझ आती है अनुभवों से। उसी प्रकार से जब house के अंदर कानून बनता है। उसी विधा से हम देखते हैं क्या कमियां हैं, क्या अच्छाईयां हैं। आने वाली पीढ़ियों तक क्या प्रभाव पैदा होगा। मैं चाहूंगा थोड़ा सा आप कोशिश कीजिए, आप बहुत बड़ा contribute कर सकते हैं क्योंकि आपके अंदर देखने की, सुनने की और शक्ति दी है। जो आप चीजों को समय से पहले भांप सकते हैं, शायद पुरष नहीं भांप सकते हैं।

उसके क्या Reification होंगे, उसका अंदाजा शायद आपको जल्दी आता है, पुरुष को शायद नहीं आता है। ये ईश्वर दत्त शक्ति आपके पास है। क्या इसका उपयोग विधायिका में हो सकता है क्या, हम जहां बैठे हैं वहां हो सकता है, हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम करेंगे। जनप्रतिनिधि के नाते हमारी अपनी कोई छवि बनी है क्या। मैं मानता हूं कि, आपसे आग्रह करूंगा कि आप carefully प्रयास कीजिए कि आपके क्षेत्र में आपकी एक छवि हो, आपकी पहचान वो बने और ये एक साधना है, एक निरंतरता है तब जाकर के बनती है। जैसा मान लीजिए कोई जनप्रतिनिधि होता है कि भई मंगल और बुध सुबह 8 बजे मेरा इस जगह पर मिलना तय, मतलब है। बारिश हो, धूप हो, कुछ भी आपकी पहचान बन जाएगी। अरे वाह मंगल या बुध यानि हमारे जनप्रतिनिधि यहां होंगे ही होंगे, जरूर मिलेंगे। हम कहेंगे भई ये telephone number पर message दे दीजिए, मैं रहूं या न रहूं वो telephone number आपके जैसी ही ताकतवर बन जाए। ऐसा एक जनप्रतिनिधि के नाते।

हमारे मतदान क्षेत्र में, हम अपनी एक पहचान दर्ज करा सकते हैं क्या और आप देखिए एक बार जनसामान्य में आपकी कार्यशैली की, आपके वाणी, विचार, व्यवहार की एक अगर particular छवि बनी, वो लंबे अरसे तक आपको काम आएगी, लंबे अरसे तक काम आएगी और ये कोशिश करनी चाहिए। जनप्रतिनिधि के नाते कभी-कभार, राजनीति एक competition का खेल होता है, स्पर्धा हर पल होती है लेकिन जब स्पर्धा में ईर्ष्या भाव प्रबल हो जाता है तो मानकर चलिए कि हम आगे जाने के हकदार नहीं रहते हैं और उसके कारण क्या होता है कि अगर हमारे कार्यक्षेत्र में दो-चार और महिलाएं तेजस्वी नजर आएं, ताकतवर नजर आएं तो हमारा हौंसला पस्त हो जाता है, हमें डर लगता है। कहीं यार अगली बार टिकट इसको तो नहीं मिल जाएगी, मेरा क्या होगा। हमें अपने आपको निरंतर able बनाते हुए आगे जाना चाहिए और अगर हम कोशिश करेंगे कि मैं हूं जो हूं लेकिन मैं किसी को आने नहीं दूं तो आप मानकर चलिए कि आने वाले प्रवाह की ताकत इतनी होगी कि वो आपको नीचे गिराकर के ऊपर चले जाएंगे और तब आप इतने नीचे चले जाएंगे कि कभी ऊपर नहीं होंगे। लेकिन अगर आप औरों को आने देते हैं, आने देते हैं। आप ऊपर चले जाएंगे, नीचे आपका बेस बनता चला जाएगा, पिरामिड की तरह आपकी ताकत बढ़ती जाएगी। 

ये सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधि के नाते मेरी अपनी शक्ति और शख्सियत, इसके लिए मुझे कोशिश करनी चाहिए। हम ये तय करें, हमारे हर एक के कार्यक्षेत्र में, एक-तिहाई महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं। कोई गांव का नेतृत्व कर रही हैं, कोई नगर का नेतृत्व कर रही हैं, कोई शहर का कर रही हैं, कोई बड़े शहर, एक तिहाई क्योंकि one-third chairmanship किसी न किसी महिला के हाथ में है। ये एक-तिहाई प्रतिनिधि, बाकी छोड़िए, ये एक-तिहाई प्रतिनिधि वो आपकी सोच, आपके विचार को, जो आपके under में काम करते हैं, आपके कार्यक्षेत्र में हैं। अगर आप विधायक हैं और 100 गांव हैं, अगर उस 100 गांव के अंदर से 30-35 महिलाएं हैं, प्रधान महिलाएं हैं क्या आपने उनको empower किया है, क्या आपने उनका सशक्तिकरण किया है, क्या आपने कभी एक दिन उनके साथ बिताया है। 

मैं आपसे आग्रह करूंगा कि जो सुमित्रा जी ने हम सब के लिए यहां पर किया, क्या आप जाकर के अपने लोकसभा क्षेत्र में या अपने विधानसभा क्षेत्र में, वहां जो elected महिलाएं हैं क्या उनका एक दिन का कार्यक्रम आप कर सकते हैं क्या, इस बात को आप ले जा सकते हैं क्या, आप देखिए ये चीज नीचे तक चली जाए तब तो ये सशक्तिकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा बदलाव का माहौल बनेगा और किसी भी दल की क्यों न हो इसमें दलबाजी नहीं होनी चाहिए। आपने देखा यहां सभी दल के लोग हैं और मैं तो सुमित्रा जी को बधाई देता हूं उन्होंने इस कार्यक्रम को बनाने के लिए जो कमेटी बनाई थी वो सब दल के लोग थे और करीब-करीब सब Junior MP थे लेकिन उन्होंने बड़े उत्साह के साथ इसे Plan किया। कहने का तात्पर्य है कि हम, हमारी इस इकाई को Empower कैसे करें, ताकतवर कैसे बनाएं, उनके अंदर सामर्थ्य कैसे लाएं। ये सामर्थ्य लाने के तरीकों में हम खुद नेतृत्व कर सकते हैं क्या, अगर हम नेतृत्व करेंगे तो हम बहुत बड़ी परिवर्तन ला सकते हैं।

एक और विषय है जिस पर मैं आपसे आग्रह करूंगा वो है Technology, हम ये मानकर चलें Technology का एक बहुत बड़ा role व्यक्ति के जीवन में, समाज के जीवन में सुनिश्चित हो चुका है। हमने अपने आप को उसके साथ cope up करना पड़ रहा है। मेरा ये मत है कि पुरुषों में Technology को adopt करने की जितनी ताकत है, उससे ज्यादा Technology को adopt करने की ताकत महिलाओं में है। आप देखिए किसी भी kitchen में जाइए आप, Most Modern Gadget Technology के लिए जो kitchen में उपयोग आता है वो महिलाएं आराम से उपयोग करती होंगी। इतना ही नहीं उनके घर में kitchen में मदद करने वाली कोई अनपढ़ भी महिला होगी लेकिन उसको वो सब चलाना आता होगा कैसे चलाना है, क्या कैसे चलाना है, सब कुछ उसे आता होगा। मतलब Technology adopt करने की महिलाओं की एक विशेष शक्ति होती है।

आपने देखा होगा Consumer Product जो करते हैं उनका भी target क्या रहता है कि women centric production कि उसको मालूम है कि market तुरंत मिलेगा क्योंकि वो तुरंत स्वीकार करती है। Technology महिलाओं के लिए कोई नई नहीं होती है, वो स्वीकार करती है लेकिन जनप्रतिनिध के नाते जो बदला हुआ युग है, उसमें हम Technology का कैसे उपयोग कर सकते हैं। हमारे communication के लिए technology का उपयोग कैसे कर सकते हैं। हम अपने कार्यक्षेत्र में, लोक संपर्क के लिए technology का उपयोग कैसे करें, हम जनता का सामान्य बातों को जानने के लिए technology का कैसे उपयोग करें, हमारी अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए technology का उपयोग कैसे करें, उसका भरपूर प्रयास करना चाहिए। आज आपका कोई मतदाता ऐसा नहीं होगा कि जो Mobile Phoneसे connect न हो, 2 percentभी नहीं होंगे लेकिन आप उनसे connect हैं, मतलब something is missingअगर आज यहां के दो दिन के अनुभव आप इस technology के माध्यम से करें तो देश औऱ दुनिया को पता चलेगा कि हां ये कुछ हो रहा है और जानकारियां पाने का उत्तम से उत्तम साधन है।

मेरा तो अनुभव है। मैं ऩरेंद्र मोदी एप पर दखता हूं इतने लोग मेरे से जुड़े हुए हैं, मुझे इतनी जानकारियां देते हैं। हर चीज का immediate पता चलता है। कुछ हुआ तो immediateपता चलता है। इतनी well inform रह सकता हूं काम के अंदर। mygov.in एक platform चलाता हूं PMO से, उसके द्वारा भी मैं जनसामान्य को जोड़ता हूं। आप भी अपने तरीके से ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं और मैं तो लोकसभा को, राज्यसभा को एक प्रार्थना करूंगा कि आप women प्रतिनिधि का एक e platform तैयार कर सकते हैं क्या और उनकी जो बातें हैं वो officially लोकसभा, राज्यसभा website को चलाएं। पूरे देश के महिला प्रतिनिधियों के लिए एक अवसर दिया जाए। देखिए technology की अपनी एक ताकत है और मेरा एक अनुभव है। मैं जब गुजरात में मुख्यमंत्री था, कपराडा एक तहसील है। बहुत ही interior बहुत ही Tribal belt है। आमतौर पर किसी मुख्यमंत्री का वहां जाना होता ही नहीं लेकिन मेरा अपने कार्यक्षेत्र में काम का आग्रह रहता था सभी क्षेत्र में स्थानों पर जाऊं, खुद जाने मेरा प्रयास रहता था। लेकिन मेरा वहां जाना बन ही नहीं रहा था। दो-तीन साल चले गए उस इलाके में जाना हुआ ही नहीं। मैंने कहा भई मैं जाऊंगा, कुछ नहीं तो एक पेड़ लगाकर के वापस आऊंगा, लेकिन जाऊंगा।

खैर फिर हमारे अफसरों को भी लगा कि ये तो अब जाना ही है इनको तो आखिरकर उन्होंने एक कार्यक्रम ढूंढा, एक chilling center का उद्घाटन करना था। chilling center क्या होता है, दूध आता है, दूध को थोड़े समय रखने के लिए काम होता है और 50-60 लाख का होता है। अब वो संकोच कर रहे थे कि मुख्यमंत्री 50 लाख रुपए केproject के लिए जाएंगे। मैंने कहा भी मैं जाऊंगा, मुझे जाना है, उस इलाके में मैं गया नहीं, मुझे जाना है। मैं गया तो वो तो forest था पूरा तो जनसभा के लिए जगह भी नहीं थी लेकिन उससे तीन किलोमीटर दूर एक स्कूल के मैदान में उन्होंने public meeting रखी थी लेकिन यहां जहां chilling center पर मैं गया, वहां दूध भरने वाली आदिवासी 30-35 बहनें उन्होंने बुलाकर के रखी थीं,chilling center का उद्घाटन करना था। मैं हैरान था जब मैं वहां कार्यक्रम के लिए गया तो ये सारी Tribal बहनें वो, जो security की fencing की गई थी वहां पर खड़ी थीं। हर एक के हाथ में Mobile Phone था और photo निकालती थीं।

मैं उस इलाके की बात करता हूं जहां CM जाते नहीं हैं forest है, बिल्कुल Tribal लोग हैं। उस समय की बात करता हूं, 10 साल पहले की बात कर रहा हूं। सब photo निकाल रही थीं तो मुझे आश्चर्य हुआ, मैं उनके पास गया, मैंने कहा ये photo निकालकर क्या करोगे आप लोग और उन्होंने जो जवाब दिया वो मैं आज भी भूल नहीं सकता हूं। उन्होंने कहा इसको जाकर के download करा देंगे। वो पढ़ी-लिखी नहीं थीं लेकिन download शब्द उनको मालूम था। Mobile Phone से किसी दुकान में जाकर के download होता है। कहने का तात्पर्य ये है कि ये technology कहां-कहां पहुंची है। क्या हमने अपने आप को उसके साथ connect करने का प्रयास किया है। आपकी अपनी ताकत बढ़ाने की दिशा में आपने प्रयास करना चाहिए। 

एक और विषय है communication, मैं ये नहीं कहता हूं कि आपने कोई बहुत बड़े orator बनना चाहिए, जरूर नहीं है, बन सकते हैं, अच्छी बात है लेकिन ये inferiority की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप कोशिश करें तो आप अपनी बातों को ढंग से बताने की ताकत आ सकती है।

आप जनप्रतिनिधि हैं, एक काम कर सकें अगर आप technosavy हैं तो अपने mobile पर उपयोग करें या तो एक छोटा सा I pad रख सकते हैं या नहीं है तो diary में लिख सकते हैं। क्या आप लगातार एक diary maintain करते चलें। अखबार में कोई चीज पढ़ी है लिखकर के और उसमें department बना दीजिए Education का, Irrigation का, Urban development का, Rural Development का और उसमें लिखते चले जाइए घटनाएं, जोड़ते चले जाइए। सालभर के बाद देखोगे आप, आपका अपना ज्ञान का भंडार इतना बड़ा होगा कि कहीं पर भी किसी विषय को लेकर के रूबरू हो रहा होगा तो दो मिनट लेगा आपकी diary को नजर कर लिया, आप एक बड़े विश्वास के साथ, facts and figures के साथ चीजें प्रस्तुत कर सकते हैं।

मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आपको अपने आपको प्रभावी भी बनाना पड़ेगा और अगर आप अपने आप को प्रभावी बने रहने के लिए जो प्रय़ास करने चाहिए अगर उसको आप नहीं करेंगे तो सिर्फ व्यवस्थाओं बदलने से परिणाम नहीं आता है। Structure में इधर-उधर बदलाव होता रहेगा, समय-समय पर होता भी रहता है। आवश्यकता है उसमें प्राणवान कैसे बनाएं हम अपनी ताकत को कैसे जोड़ें।

हम कोशिश करें कम से कम समय में हम अपनी बात को कैसे रखें, सटीक तरीके से कैसे रखें और अगर इस बात में आपकी ताकत आई तो आप देखिए लोग आपकी बात से सहमत होते जाएंगे, जुड़ते चले जाएंगे। आपकी leadership establishment करने के लिए आपके पास उम्दा व्यक्तित्व जरूरत नहीं है, आपके पास विषयों की जानकारी होना जरूरी है। आप सदन में बोलते हैं। सब लोगों को सब विषयों का ज्ञान हो ये जरूरी नहीं है। क्या कोई प्रधानमंत्री बन गया तो सब विषयों का उसे ज्ञान होता है, कोई आवश्यक नहीं है लेकिन जिसमें आपकी रुचि है, ऐसे एक या दो विषयों पर आपकी मास्टरी होनी चाहिए। हर बात उससे संबंधित जो चींज मिले, उसको collect करते जाना चाहिए। आपको लगता है कि पानी पर मेरी मास्टरी, मेरे क्षेत्र में पानी का problem है तो मैं पानी पर मास्टरी करूं। आपको लगता है कि नहीं-नहीं मैं technology पर मास्टरी करूं, technology पर करूं। आपको लगता है नहीं-नहीं मैं शिक्षा विषय पर।

एक विषय पकड़िए, जिस विषय पर आप सर्वाधिक grip ले सकते हैं, सरलता से ले सकते हैं, जानकारियां जोड़ सकते हैं। आप देखिए सदन में routine में शायद आपको आपकी पार्टी के लोग बोलने का अवसर न देते हों लेकिन एकाध पर विषय पर आपकी मास्टरी होगी तो वो खोजते हुआ आएंगे, नहीं-नहीं भई मंगल को Parliament-Assembly में जरूर आइए ये विषय है, आपको तो बोलना ही पड़ेगा, आप बोलेंगे तो दम आएगा क्योंकि आपके पास भंडार भरा पड़ा है। आपको किसी कृपा की जरूरत नहीं पडेगी और इसलिए हम स्वंय अपने आप में कैसे सज्ज करें अपने आप को, उसके लिए प्रयास करें और अगर ये प्रयास करें तो हमें उत्तम परिणाम भी मिलता है। समय काफी मैंने लिया है, आप लोगों को भोजन भी करना है और आप लोग photo के लिए भी तैयार होकर के आए हैं तो मैं फिर एक बार सुमित्रा जी को बहुत-बहुत अभिनंदर करता हूं और आप सबको भी, एक और बात मेरे मन में आती है ये जो Parliament की कमेटियां जाती हैं, Assembly की कमेटियां जाती हैं, राज्यो में जाती हैं। आप भी जाते हैं उसमें क्या आप प्रयास कर सकते हैं क्या, आप पूरा कार्यक्रम जो बनेगा, बनेगा लेकिन आप जहां जाएंगे वहां, वहां की महिला जनप्रतिनिधियों के साथ आधा घंटा, एक घंटा जरूर परिचय करेंगे, मिलेंगे, ये कर सकते हैं क्या, आप देखिए आपको इतनी जानकारियां मिलेंगी।

दूसरा मैं विशेषकर के MPs को प्रार्थना करता हूं। यहां कई राज्यों के MLAs के साथ आपका परिचय हुआ है। सदन के अंदर देश के किसी भी कोने की चर्चा आ पड़ती है। क्या आपने telephone पर आपने जहां परिचय हुआ है उस राज्य की किसी MLA से उसको phone करके पूछ सकते हैं कि भई सदन में ये विषय उठने की संभावना है, तुम्हारे राज्य का हुआ है, बताओ न क्या है, वो कहेगी नहीं मैं एक घंटे में ढूंढकर के बताता हूं। देखिए दोनों तरफ फायदा हो जाएगा। वो भी उस घटना पर concentration करेगी, वो भी study करेगी, आपको घंटे भर में report करेगी और आपको भी अखबारों के द्वारा नहीं first-hand information मिलेगी कि भई केरल में, तिरुवनंतपुरम में ये घटना घटी है और वहां की MLA मुझे ये कह रही हैं तो मैं house के अंदर मैं इस बात के अंदर में ये सही बात बताऊंगी। 

आप देखिए जानकारियों के स्रोत ये बहुत आवश्यक हैं। इसमें से और कुछ हम साथ ले जाएं या न ले जा पाएं लेकिन ये जो दायरे से आपका परिचय हुआ है, दल कोई भी होगा, आप contact बनाइए आपको जानकारियों के स्रोत आपके बढ़ते जाएंगे तो हम कहीं जाएं दौरे पर, कमेटियां में आग्रह रखें कि हम वहां के जनप्रतिनिधियों से सामूहिक रूप से आधा घंटा, एक घंटा अवश्य मिले। सरकार programme बनाएं या न बनाएं, हम ये प्रयास करें। धीरे-धीरे ये अपने आप में एक शक्ति संफुट बन जाएगा। जो शक्ति संफुट राष्ट्र को सशक्तिकरण करने की प्रक्रिया में एक बहुत बड़ी अहम भूमिका अदा करेगा और वो दिन दूर नहीं होगा कि जब women empowerment तो होता ही होता चला जाएगा लेकिन देश में women development से आगे बढ़कर के women led development की दिशा में आगे बढ़ेगा। इसी एक पूरी श्रद्धा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद।

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