अभिनेता इरफान खान ने दिया विवादित बयान, कहा- 'खरीदे बकरों की कुर्बानी से कौन-सी दुआ कुबूल होती है?'

नई दिल्ली : आने वाली इमोशनल थ्रिलर मूवी 'मदारी' के प्रमोशनल इवेंट में बकरों की कुर्बानी को लेकर अभिनेता इरफान खान ने जयपुर में विवादित बयान दिया है, वो अपने आने वाली फिल्म 'मदारी' के प्रमोशनल इवेंट के लिए जयपुर पहुंचे थे इरफान ने कहा कि कुर्बानी का मतलब लोग समझते हैं कि बाजार से दो बकरे खरीद कर लाओ और उसकी कु्र्बानी करके अपनी दुआ कबूल करवाओ, अब जरा ये बताइये कि किसी को मारने से कैसे दुआ कबूल हो सकती है?

कुर्बानी का मतलब होता है अपनी किसी प्रिय चीज को खुदा के सामने कुर्बान करना। ना कि बाजार के किसी जानवर को खरीदकर काट देना। इरफान ने यह भी कहा, 'हमारे जो भी त्योहार हैं, उनका मतलब हमें वापस से समझना चाहिए कि वे किसलिए बनाए गए हैं। सौभाग्य है कि ऐसे देश में रह रहा हूं जहां हर धर्म का सम्मान होता है।'

गौरतलब है कि इरफान खान इनदिनों अपनी आगामी फिल्‍म 'मदारी' के प्रमोशन को लेकर कई शहरों का दौरा कर रहे हैं।उन्‍होंने मंत्रियों पर भी निशाना साधा और कहा,' जिस तरह एक मदारी डमरू बजाकर ऐसा वादा करता है कि सांप और नेवले की लड़ाई दिखायेगा, लेकिन कभी दिखाता नहीं। कुछ ऐसे ही वादे मंत्री करते हैं पर उन वादों को पूरा नहीं कर पाते।'

वहीं इरफान ने अभिनेता सलमान खान और दूसरे सेलीब्रिटीज के बयानों को लेकर कहा, सेलीब्रिटीज भी इंसान होते हैं आप उनको महान आत्‍मा मत समझिये। उनसे भी गलती हो सकती है। उनकी बातों को सीरीयसली नहीं लेना चाहिये। 'मदारी' एक ऐसे व्‍यक्ति की कहानी है जो अपने बेटे की मौत का बदला लेने के लिए गृहमंत्री के बेटे का अपहरण कर लेता है।

इरफान ने ये भी कहा, 'हमने विदेशों से फादर्स डे-मदर्स डे उधार लिए हैं। विदेशी साल में एक दिन पिता से मिलते हैं, लेकिन हम रोज पिता से मिलते हैं। फादर्स डे को कैसे मनाएं, इसके लिए मैं महात्मा गांधी से रूबरू कराने के लिए बेटे को साबरमती आश्रम लेकर गया।' इरफान खान के इस बयान को लेकर मुस्लिम समुदाय में काफी रोष भरी प्रतिक्रियायें सामने आई हैं।

SOURCE - ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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