बीएड कॉलेजों में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा नहीं, फीस स्ट्रक्चर असंवैधानिक


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हाईकोर्टने राज्य के बीएड कॉलेजों में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (केट) को कानूनी रूप से सही ठहराया है। कोर्ट ने इसके लिए चांसलर (गवर्नर) द्वारा जारी ऑर्डिनेंस को संवैधानिक रूप से सही करार देते हुए राज्य सरकार और सभी विश्वविद्यालयों को एक महीने में केट लेने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने अपवाद स्वरूप वैसे अल्पसंख्यक कॉलेजों को केट से मुक्त रखा है, जो पिछले 25 वर्षों से परंपरागत तरीके से एक विशिष्ट दाखिला पद्धति अपनाए हुए हैं और जिन पर आजतक सरकार ने अंगुली नहीं उठाई है। 
दोवर्षीय बीएड की अधिकतम फीस 95 हजार : मुख्यन्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने लगभग तीन दर्जन अल्पसंख्यक बीएड कॉलेजों की तरफ से दायर याचिकाओं को निष्पादित करते हुए चांसलर द्वारा 2 सितंबर, 2015 को जारी ऑर्डिनेंस को संवैधानिक रूप से सही ठहराते हुए उक्त आदेश पारित किया। हालांकि खंडपीठ ने ऑर्डिनेंस के उस हिस्से को असंवैधानिक ठहराया, जिसमें दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम की अधिकतम फीस 95 हजार रुपए तय की गई है। 

सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों का नहीं रखा गया ध्यान : हाईकोर्टने पाया कि फीस स्ट्रक्चर तय करने में चांसलर ऑफिस ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश को ध्यान में नहीं रखा है और यह मनमानेपन का प्रतीक है। याचिकाकर्ता बीएड संस्थानों में गैर वित्तीय अल्पसंख्यक और गैर अल्पसंख्यक दोनों तरह के कॉलेज थे। याचिका में कहा गया था कि यह ऑर्डिनेंस संविधान में व्यवसाय करने और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को दिए मौलिक अधिकार का हनन है।
Source - Bhaskar

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