इजरायल का यह त्योहार मनाकर आपको भी आएगी दीपावली की याद

तेल अवीव। प्रकाश की किरणों को अंधेरे पर उजाले की विजय कहा जाता है। भारत में दीपावली प्रकाश का पर्व माना जाता है। इस दिन हम दीप प्रज्वलित करने के साथ अच्छे भविष्य की कामना करते हैं। 


इजरायल में भी ऐसा ही एक पर्व मनाया जाता है जिसमें प्रकाश की प्रधानता होती है। वहां इसे हनुका उत्सव कहा जाता है। इजरायल के इतिहास के अनुसार, यह पर्व जेरुसलेम स्थित मंदिर के पुनर्लोकार्पण तथा यहूदी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए मनाया जाता है। 

इस साल हनुका उत्सव 6 दिसंबर के सूर्यास्त से शुरू हुआ और 14 दिसंबर के सूर्यास्त तक मनाया गया। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, हनुका उत्सव 164 ईसा पूर्व एंटीकॉउस चतुर्थ द्वारा अपवित्र किए जाने के बाद जेरुसलेम स्थित दूसरे मंदिर के पुनर्लोकार्पण और उनके दमन के बाद यहूदी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता को मजबूत करने की याद में मनाया जाता है। 


यह त्योहार भी सत्य की विजय से जुड़ा है और इसका आध्यात्मिक पक्ष भी है। इसके साथ तेल की कुप्पी के चमत्कार जुड़े हैं। कहा जाता है कि जब मंदिर में प्रकाश के लिए मोमबत्ती जलाई गई तो जैतून के तेल से वह आठ दिनों तक जलती रही।


उल्लेखनीय है कि हनुका आठ दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान हर शाम को मोमबत्तियां जलाई जाती हैं। ये मंदिर में हुए चमत्कारों का स्मरण करते हुए प्रत्येक रात्रि को जलाई जाती हैं। 


यह त्योहार इजरायल के संघर्ष और उसके लोगों की धार्मिक भावना को अभिव्यक्त करता है। हनुका को सिर्फ इजरायल में रहने वाले लोग ही नहीं मनाते बल्कि दुनिया के अन्य यहूदी भी बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं। इसकी रस्मों में से एक है चौकोर लट्टू उपहार में देने का रिवाज। 


इस लट्टू पर हिब्रू भाषा में चार अक्षर लिखे होते हैं। इन अक्षरों के लिखने का उद्देश्य भी उसी चमत्कार के बारे में बताना है जिसके लिए यह उत्सव मनाया जाता है। वहीं, पर्व के दौरान कोई सरकारी छुट्टी नहीं होती और सभी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहती हैं।

m.rajasthanpatrika

Follow by Email